swami-faceहमारी अविद्या, हमारा अज्ञान यह है कि हम जगत को तो मिथ्या मान लेते हैं परंतु अन्तः कारण को सच्चा मानते हैं। झूठ को बतलाने वाला भी तो झूठा है। जीव भी झूठा और उसकी कल्पनाएं भी झूठीं। ऐसा ज्ञान होने पर आत्म बोध होता है। 

हरि ऊँ !

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