ezimba_new_lo
भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम् ।
सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ॥
(मुझे यज्ञ और तपों का भोगने वाला, सर्व लोकों का महेश्वर तथा प्राणिमात्र का सुहृद (आत्मजन), ऐसा तत्त्व से जान कर (योगी पुरुष) शान्ति को प्राप्त होता है।)
Menu
WeCreativez WhatsApp Support
व्हाट्सप्प द्वारा हम आपके उत्तर देने क लिए तैयार हे |
हम आपकी कैसे सहायता करे ?