swami-face

मैं आनंद स्वरूप हूँ। मैं अपने को कभी भी अप्रिय नहीं होता। आत्मा की दृष्टि से ही सब प्रिय होता है, इससे सिद्ध होता है कि मैं हूँ, मैं सदा प्रकाशित रहता हूँ ………. मैं ब्रह्म हूँ और सत-चित-आनंद मेरा स्वरूप है। 

हरि ऊँ ! 

Menu
WeCreativez WhatsApp Support
व्हाट्सप्प द्वारा हम आपके उत्तर देने क लिए तैयार हे |
हम आपकी कैसे सहायता करे ?