Brahmaswaroop (ब्रह्मस्वरूप)
Vedant (वेदान्त)

Brahmaswaroop (ब्रह्मस्वरूप)

इस नश्वर जगत में तो सूर्य, चन्द्रमा, आदि का जड़ प्रकाश है । अग्नि में लोहा डालने पर जिस प्रकार...
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Chatushloki Bhagawat ॥चतुःश्लोकी भागवत॥
Vedant (वेदान्त)

Chatushloki Bhagawat ॥चतुःश्लोकी भागवत॥

श्रीभगवानुवाच अहमेवासमेवाग्रे नान्यद् यत् सदसत् परम्। पश्चादहं यदेतच्च योऽवशिष्येत सोऽस्म्यहम् ॥(१) ( श्री भगवान कहते हैं - सृष्टि के आरम्भ होने...
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Gyani Purush (ज्ञानी पुरुष)
Vedant (वेदान्त)

Gyani Purush (ज्ञानी पुरुष)

कामान्निष्कामरूपी संश्चरत्येकचारो मुनिः। स्वात्मनैव सदा तुष्टः स्वयं सर्वात्मना स्थितः॥  [ज्ञानी पुरुष, आत्म स्वरूप में सदा संतुष्ट होकर और सर्वात्म स्वरूप...
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Anany Bhav (अनन्यभाव)
Suvichar (सुविचार)

Anany Bhav (अनन्यभाव)

अहं हरे तव पादैकमूलदासानुदासो भवितास्मि भूयः ।मनः स्मरेतासुपतेर्गुणांस्तेगृणीत वाक् कर्म करोतु कायः ॥(प्रभो ! आप मुझ पर ऐसी कृपा कीजिये...
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Suvichar (सुविचार)

Man, Buddhi aur Atma (मन बुद्धि और आत्मा)

हमारी यह आत्मा, शरीर रूपी रथ पर सवार है। हमारी बुद्धि सारथी है, हमारा मन लगाम है। हमारी इन्द्रियाँ घोड़े...
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Guru Kripa (गुरु कृपा)
Suvichar (सुविचार)

Guru Kripa (गुरु कृपा)

गुरु कृपा, भक्ति का सशक्त एवं समर्थ साधन है। गुरु कृपा से ही भगवदनुग्रह प्राप्त होता है। काल, कर्म और स्वभाव...
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Satoguni Kamana (सतोगुणी कामना)
Suvichar (सुविचार)

Satoguni Kamana (सतोगुणी कामना)

सतोगुणी कामना से, हमारा संसार से राग कम होने लगता है, राग कम होने से सांसारिक दुःख कम हो जाता है...
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Agyan (अज्ञान)
Vedant (वेदान्त)

Agyan (अज्ञान)

हम जिस ब्रह्म से उत्पन्न हुये हैं, जब तक उससे हमारा साक्षात्कार नहीं हो जाता, तब तक जन्म - मरण...
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Ishwar aur Jeev (ईश्वर और जीव)
जनरल

Ishwar aur Jeev (ईश्वर और जीव)

माया में प्रतिविम्बित ब्रह्म ही ईश्वर है और अज्ञान में प्रतिविम्बित ब्रह्म ही जीव है।  हरि ॐ !
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Jeev (जीव)
Jeev (जीव)

Jeev (जीव)

जल का कोई आकार नहीं होता।.....लेकिन जल का गुण है, जल का गुण शीतलता है, जल का गुण मधुरता है। जल सगुण है लेकिन निराकार है। इसी...
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Atma (आत्मा)
Atma (आत्मा)

Atma (आत्मा)

शरीर, इंद्रियाँ, मन, बुद्धि, और अहंकार ये सब प्रकृति के कार्य हैं और नश्वर हैं। इनमें जो शुद्ध चैतन्य प्रकाशित...
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Sukh aur Anand (सुख और आनंद)
Vedant (वेदान्त)

Sukh aur Anand (सुख और आनंद)

सुख एक प्रकार की अनुकूल संवेदना है, जो सदा पराश्रित, स्थान, वस्तु अथवा व्यक्ति सापेक्ष होता है। दूसरे शब्दों में...
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Do Awasthayen (दो अवस्थाएँ)
Suvichar (सुविचार)

Do Awasthayen (दो अवस्थाएँ)

मन की शांति और स्वयं पर नियंत्रण इन दो अवस्थाओं के द्वारा हम इंद्रियों के बहिर्मुखी स्वभाव और मन- बुद्धि की बहिरंग प्रधान प्रवृत्तियों...
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Sookshma Atma (सूक्ष्म आत्मा)
Atma (आत्मा)

Sookshma Atma (सूक्ष्म आत्मा)

जब मन दूर अवस्थित ब्रह्मलोक जैसे लोकों की ओर तेजी से चलता है तो वह शुद्ध चैतन्य स्वरूप आत्मा को वहाँ पहले से ही...
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Suvichar (सुविचार)

Gurusatta (गुरुसत्ता)

मातृवत् लालयित्री च, पितृवत् मार्गदर्शिका। नमोऽस्तु गुरुसत्तायै, श्रद्धा-प्रज्ञा युता च या॥ [जो माँ की  भाँति लालन (प्रेम) करती है और पिता की भाँति (पालन) मार्गदर्शन करती है, ऐसी प्रज्ञा और श्रद्धा से युक्त 'गुरुसत्ता' को हम बारंबार प्रणाम करते हैं।]
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Nishtha (निष्ठा)
Vedant (वेदान्त)

Nishtha (निष्ठा)

सांख्यनिष्ठा ज्ञान योग के साधन से होती है और योगनिष्ठा कर्मयोग के साधन से होती है। कर्तव्य कर्मो का स्वरूप-त्याग, किसी...
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Bhagawan (भगवान्)
Suvichar (सुविचार)

Bhagawan (भगवान्)

ऐश्वर्य, धर्म, यश, लक्ष्मी, ज्ञान और वैराग्य - इन  गुणों को अपने में धारण करने वाले को भगवान् कहते हैं। ...
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Tyag (त्याग)
Vedant (वेदान्त)

Tyag (त्याग)

त्याग बोध का परिणाम है। जो अंतस् में घटित होता है, बोध के बिना त्याग केवल आडम्बर मात्र है। हरि...
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Gyan ki Saat Bhumikayen (ज्ञान की सात भूमिकायें)
Vedant (वेदान्त)

Gyan ki Saat Bhumikayen (ज्ञान की सात भूमिकायें)

ज्ञानभूमिः शुभेच्छाख्या प्रथमा परिकीर्तिता।  विचारणा द्वितीया स्यात्तृतीया तनुमानसा।। सत्त्वापत्तिश्चतुर्थी स्यात्ततोऽसंसक्तिनामिका।  पदार्थाभावनी षष्ठी सप्तमी तुर्यगा स्मृता।।  शुभेच्छा, (सु)विचारणा, तनुमानसा, सत्वापत्ति, असंसक्ति, पदार्थाभावनी...
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Chitt Shuddhi (चित्त शुद्धि)
Vedant (वेदान्त)

Chitt Shuddhi (चित्त शुद्धि)

आत्म प्राप्ति के लिये चित्त शुद्धि आवश्यक है। निष्काम कर्म एवं धर्माचरण से चित्त शुद्धि होती है। संतों के आश्रय में चित्त के...
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